Sandeep Kumar

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लेखनी कहानी -31-Mar-2024

तुम मुझे धिधकार ती रहो

मैं तुम्हें निहारती रहूंगी 
जब तक पास नहीं आ जाती हो
तब तक तुम्हें चिढ़ाती रहूंगी 
तुम मुझे,,,,,,,,,,,,,,

तुम हमारी हो 
किसी और कि नहीं
हमेशा यह बताती रहूंगी
अरे प्यार से ही सही
अपना हक जताती रहूंगी
तुम मुझे,,,,,,,,,,,,,,

फिल्म की तरह 
अपनी बात बताती रहूंगी 
नाक की नथुनी बाल की क्लिप
झटक तुम्हें सताती रहूंगी
तुम मुझे,,,,,,,,,,,,,,

माया भरी दुनिया में
तुझे यूं गले लगाती रहूंगी
तुम हाथ में आओ या ना आओ
तुम्हारी यादों को थपकियां दे सुलाती रहूंगी
तुम मुझे,,,,,,,,,,,,,,

तस्वीर वॉल पर लगा कर 
वॉल को चुमती रहुंगी 
कोई पूछेगा कौन है तो
स्वीटहर्ट जानेमन कहती रहुंगी 
तुम मुझे,,,,,,,,,,,,,,

संदीप कुमार अररिया बिहार

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5 Comments

Mohammed urooj khan

16-Apr-2024 12:18 PM

👌🏾👌🏾👌🏾

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Gunjan Kamal

11-Apr-2024 12:29 AM

👏🏻👌🏻

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HARSHADA GOSAVI

02-Apr-2024 10:13 AM

Amazing

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